तुम्हे भूल जाऊं ये होता नही


तुम्हे भूल जाऊं ये होता नही
कोई वक़्त हो दर्द सोता नही
न हो जाओ बदनाम तुम इस लिए
मैं रो रो के दामन भिगोता नही
ये वो फसल है जो उगे खुद-ब-खुद
कोई दर्द के बिज़ बोता नही
ये माना के तूफ़ान का जोर है
मैं घबरा के कश्ती डुबोता नही 

मुझसे मेरा रूह अनजान है !


मेरे अरमानों में आज भी कमजोर सी जान है 
ना जाने किन हाथों में दिल की लगाम है 
शायद है ज़िन्दगी किसी नए मोड़ पर 
या शायद मुझसे मेरा रूह अनजान है 

इश्क का यहाँ कुछ यूँ बदनाम है 
कभी रांझा, तो कभी मजनू नीलाम है 
हो गये बहुत सस्ते आँखों के जाम हैं 
इसलिए प्यार में आज सब बेईमान हैं 

करवटों में मेरी नींद बेताब है 
उलझते सुलझते सपनों के सैलाब है 
फलक तक का सफ़र है, गुमराह सड़क है 
और शायद साथ अकेलेपन का खिताब है 

अजीब अक्सर ये इश्क का नकाब है 
कोई बर्बाद तो कोई इससे आबाद है 
कोई बिछड़ के दुखी है, किसीकी मिलने की फ़रियाद है 
अब खुदा क्या करे ? इश्क थोड़ी उसकी औलाद है !

या दोस्त कोई मिल गया हमसे भी प्यारा ?

सूरज डूब गया, और उभर आया ध्रुव तारा 
पर आज भी नही आया पैगाम तुम्हारा 
रूठी है हमारी किस्मत, जो भूल गये नाम हमारा 
या दोस्त कोई मिल गया, हमसे भी प्यारा ?

आज दिल ने फिर किया आँखों का इशारा 
सिसक ने याद दिलाया कि गम है सहारा 
कटते नही दिन कैसे हो रातों का गुजारा ?
काश सुन पाते तुम जब दिल ने था तुम्हे पुकारा 

तन्हाई ने दिखाया था जिंदगी जीने का नज़ारा 
काट ही लेते वैसे, हम अपना ये जीवन सारा 
पर आ गये तुम जैसे किसीने डूबते को उभारा 
फिर कहाँ चल दिए, छोड़के के साथ हमारा ?

अब आस लगायें बैठें, या तोड़ दें वादों के पुल 
चलें आगे सीना ताने या बैठें संभाले हाल-ए-दिल 
कभी सोचते हैं , 'अब कहाँ आ गये हैं'
शायद गर्दिश में कहीं, छुट गयी महफ़िल 

हिचकियाँ रो आती होंगी, जब याद करता है दिल बेचारा 
तो बस एक बार मुड़ के मुस्कुरा दो दोबारा 
जीने की वजह मिल जाए और सुधर जाये दिल आवारा 
वरना समझेंगे सच में दिल मिल गया, दोस्त कोई हमसे भी प्यारा !

यादें !


मौसम में आज बरसने का मन है 
ठंडी हवा के साथ बूंदों का आगमन है 
ऐसे में क्यूँ मेरा दिल भर आया है 
याद आयी तेरी या तन्हाई ने बुलाया है 

मिट्टी की खुश्बू ने सबको मदहोश कर दिया 
बच्चों ने रास्ते पर ख़ुशी का ऐलान कर लिया 
पर क्यूँ फिर मौसम ने मेरी आँखों को नम कर दिया 
शायद टूटा है कोई सपना जिसने मन को झकझोर दिया 

ऐसे बारिश में भी क्यों है प्यास अधूरी 
क्यों नही होती कभी दिल की कमी पूरी 
कभी खिड़की पर तो कभी बिस्तर पर बैठते हैं हम 
और याद करते हैं वो पहली मुलाकात हमारी 

वो एक छाते में हमारा संभल के चलना 
वो बाहों में प्यार से लड़ना झगड़ना 
और चलते हुए बस तुम्हारी बातें सुनना 
और वो शरमाती हुई मुस्कान पे दिल का मचलना  

ना आएगा वो पल लौट कर दोबारा 
ना आएगी वो रात कभी मुड़ के दोबारा 
शुरू हो गयी है बरसात अब आसमान से 
और सुखा नही है अब मेरी आँखों का किनारा 

हाल-ए-दिल !


टूटे हुए दिल का साज़ सुनाऊ तो कैसे 
ज़ख्मों पर अपने मलहम लगाऊं तो कैसे 
गुमराह रास्तों पर चलने की चाह तो बहुत है 
पर मंजिल की तरफ पहला कदम बढाऊं तो कैसे ?

रोम-रोम से उठी ये कराह सुनाऊ तो किसको 
दिल चीख उठा मेरा पर जताऊ तो किसको 
जी नही सकता और मर नही पाता
पर हाल-ए-दिल ये अपना बताऊ तो किसको ?

यूँ तो हर मोड़ पर मिल जाते हैं नये दोस्त मुझे 
हर पल भीड़ में घेरे रखते हैं वो मुझे 
क्यूँ फिर हर वक़्त अकेले रखते हैं वो मुझे 
क्यूँ फिर हर पल अकेला पड़ जाता हूँ मैं 
शायद खुद में ही मक़सूद हैं जो भूल जाते हैं मुझे 

दवा बे-असर, दुआ भी बेकार बन गयी 
रुसवा हुई यूँ जिंदगी की जैसे कहर बन गयी 
हाथ की लकीरों में धुंधला गयी यूँ किस्मत 
कसम खुदा की साँसे ज़हर बन गयी !