Short shayari




रंजिश ही सही दिल दुखाने के लिए आ 
आ फिर से मुझे छोड़ जाने के लिए आ 
किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम 
तू मुझसे खफा है तो जमाने के लिए आ !

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यूँ तो मसले औ मुद्दे बहुत हैं,
लिखने को मगर...
कमबख्त इन कागजों को तेरा ही 
जिक्र अजीज है...

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इक बार उलझना है तुमसे 
बहुत कुछ सुलझाने के लिए...


ना जाने कब से इंतज़ार है उसका 
जो कह गया था मेरा इंतज़ार मत करना !

मासूम सा था वो जान मेरा !

खुबसूरत, ख्वाब था वो
जब वो मेरे साथ था 
सारा जहाँ था मेरा 
मासूम सा था वो जान मेरा 

कुछ पल का साथ उसका
जिन्दगी थी और खुशी भी 
थी वहाँ पतवार भी
थी हजारों कश्तियाँ 

मेरा वो अभिमान था 
मेरा वो पहचान था 
या यूँ कहो की जान था 
मासूम सा.......

समंदर सारे शराब होते तो सोचो कितना बवाल होता !

समंदर सारे शराब होते तो सोचो कितना बवाल होता,

हक़ीक़त सारे ख़्वाब होते तो सोचो कितना बवाल होता,
किसी के दिल में क्या छुपा है ये बस ख़ुदा ही जानता है,


दिल अगर बेनक़ाब होते तो सोचो कितना बवाल होता
थी ख़ामोशी हमारी फितरत में तभी तो बरसो निभ गयी लोगो से,


अगर मुँह में हमारे जवाब होते तो सोचो कितना बवाल होता,

हम तो अच्छे थे पर लोगो की नज़र में सदा बुरे ही रहे,
कहीं हम सच में ख़राब होते तो सोचो कितना बवाल होता..

अपने कहने को तो बहुत मिले...














क्या ख़ूब ज़माने की वफ़ा देखते रहे 
हर बात में हम अपनी खता देखते रहे 

यूँ तो ज़माने ने बदले बहुत रंग 
पर हम उसी की ज़फ़ा देखते रहे 

मुश्किलों में थी ज़िन्दगी हमारी 
हम तो बस हालातों का मज़ा देखते रहे 

अपना कहने को तो बहुत मिले 
पर हम उसका एहसास देखते रहे 

यूँ तो चाहत का समन्दर था हमारे पास
हम तो किसी के मिलने की आस देखते रहे...